मंगलवार, 28 मई 2019
शनिवार, 27 अक्टूबर 2018
उच्चारण स्थान,संधि एवं समास
वर्णों के उच्चारण स्थान
कंठ- (अकुहविसर्जनीयानाम कंठ) = अ, आ, क वर्ग (क,ख, ग, घ), ह एवं विसर्ग
तालु- (इचुयशानाम तालु ) = इ,ई, च वर्ग (च ,छ, ज, झ ), य एवं श
मूर्धा - (ऋटूरषाणाम मूर्धा ) = ऋ ,ट वर्ग (ट ,ठ ,ड ,ढ ) र एवं ष
ओष्ठौ- (उपूपध्यामानीयानाम ओष्ठौ) = उ, ऊ ,प वर्ग ,(प, फ,ब,भ )
दांत - (ल्रतुलसानाम दंता ) = ल, त वर्ग (त, थ, द,ध )एवं स
कंठ-तालु = ए ऐ
कंठ-ओष्ठ = ओ औ
दन्तोष्ठ = व
नासिका- सभी वर्गों के पंचम वर्ण
संधि (संक्षिप्त रूप में )
दो
वर्णों के परस्पर मेल (से होने वाले विकार या परिवर्तन) = संधि
संधि
(१ स्वर संधि ,२ व्यंजन संधि ,३ विसर्ग संधि )
स्वर
संधि भेद –(दीर्घ संधि ,गुण संधि ,वृद्धि संधि ,यण संधि एवं अयादि संधि )
१ दीर्घ
संधि - अक: सवर्णे दीर्घ:
ह्रस्व
या दीर्घ अक अर्थात् (अ,इ,उ,ऋ) के बाद सवर्ण स्वर आए तो दोनों मिलकर दीर्घ होते है
|जैसे –
अ/आ +
अ/आ = आ (गीता+अंजलि =गीतांजलि,परम+अर्थ =परमार्थ)
इ/ई +
इ/ई = ई (अभि+ईप्सा =अभीप्सा,रजनी+ईश =रजनीश )
उ/ऊ +
उ/ऊ = ऊ (कटु+उक्ति =कटूक्ति ,भू+ऊर्ध्व =भूर्ध्व )
२ गुण
संधि –आद गुण
आद (अ,आ)
से इक (इ,उ,ऋ,ल्र) परे होने पर पूर्व पर के स्थान पर गुण (ए,ओ,अर) होता है | जैसे –
आद + इक
= गुण
अ/आ +
इ/ई =ए (न+इति =नेति,राका+ईश =राकेश,योग+ईश्वर =योगेश्वर)
अ/आ +
उ/ऊ =ओ (वीर+उचित =वीरोचित,महा+उत्सव =महोत्सव ,पर+उपकार =परोपकार )
अ/आ +
ऋ =अर (महा+ऋषि =महर्षि ,ग्रीष्म +ऋतु =ग्रीष्मर्तु ,सप्त+ऋषि =सप्तर्षि )
३ वृद्धि
संधि –वृद्धिरेचि
अ,आ
से परे एच (ए,ओ,ऐ,औ) होने पर पूर्व और पर के स्थान पर वृद्धि (ऐ,औ) होता है | जैसे
–
अच् +एच
= वृद्धि
अ/आ+ए/ऐ =ऐ (हित+एषी =हितैषी,एक +एक =एकैक ,महा+ऐश्वर्य
=महैश्वर्य )
अ/आ+ओ
/औ =औ (परम+ओजस्वी =परमौजस्वी,वन +औषध =वनौषध,महा +औषध =महौषध )
४ अयादि
संधि –एचोअयवायाव
एच (ए,ओ,ऐ,औ)
के बाद यदि अच हो तो एच (ए,ओ,ऐ,औ) के
स्थान पर क्रमशः अय,आय,अव,आव होता है | जैसे
ए + ए/ऐ
के अलावा अन्य स्वर=ए के स्थान पर अय(ने +अन =नयन ,शे +अन =शयन )
ऐ
+ ए/ऐ के अलावा अन्य स्वर= ऐ के
स्थान पर आय (नै +अक =नायक ,दै+इनी =दायिनी )
ओ + ओ/औ
के अलावा अन्य स्वर=ओ के स्थान पर अव् (गो +अक्ष =गवाक्ष,हो+अन =हवन )
औ + ओ/औ
के अलावा अन्य स्वर=औ के स्थान पर आव्
(पौ +अक =पावक,नौ+इक=
नाविक,भौ+उक =भावुक )
५ यण
संधि –इकोयणचि
इक (इ,उ,ऋ,ल्र)
के स्थान यण (य,व,र,ल) होता है | जैसे –
इ/ई+
इ/ई के अलावा अन्य स्वर= य (अभि +अर्थी =अभ्यर्थी ,उपरि +उक्त =उपर्युक्त )
उ/ऊ +
उ/ऊ के अलावा अन्य स्वर=व् (सु +अच्छ =स्वच्छ ,पू +इत्र =पवित्र ,सु+आगत =स्वागत )
ऋ
+ ऋ के अलावा अन्य स्वर=र (पितृ +अनुमति
=पित्रनुमति ,मातृ+आनंद =मात्रानंद )
समास
समास अर्थात् संक्षिप्तीकरण
दो
शब्दों का मेल समास कहलाता है |
१ अव्ययी भाव समास –पहला
शब्द अव्यय होता है | उदाहरण ;जैसे –
समास
=समास विग्रह
आमरण
=मरण तक
प्रत्यक्ष
=अक्षि (आँख) के आगे
यथोचित
=जैसा उचित है वैसा
लाजवाब
=जिसका जवाब न हो
दिन
भर =पूरे दिन
एक-एक
=एक के बाद एक
२
तत्पुरुष समास –कारक चिह्नों के
लोप से बनने वाला समास
समास
=समास विग्रह
मनोहर
=मन को हरने वाला
धर्मांध
=धर्म से अंधा
देशभक्ति
=देश के लिए भक्ति
पदमुक्त
=पद से मुक्त
मंत्रिपरिषद
=मंत्रियों की परिषद्
कविराज
=कवियों में राजा
३ द्वंद्व
समास – द्वंद्व समास में
दोनों ही शब्दों की प्रधानता होती है तथा और ,या ,अथवा आदि संयोजक शब्दों के लोप
कर देने से बनता है |
समास
=समास विग्रह
अन्नजल
=अन्न और जल
पच्चीस
= पांच और बीस
हरिहर
=हरि(विष्णु) और हर (शिव)
फल-फूल
=फल,फूल आदि
एक-दो
=एक या दो
४ द्विगु
समास –जिस समास में पहला
पद संख्यावाचक विशेषण हो और पूरा समास समूह का बोध कराए उसे द्विगु समास कहते है |
समास
=समास विग्रह
एकांकी
=एक अंक का (नाटक)
त्रिमूर्ति
=तीन मूर्तियों का समूह
द्विवेदी
=दो वेदों को जानने वाला
चौराहा
=चार राहों का समूह
पंचामृत
=पाँच अमृतों का योग
५
कर्मधारय समास –परस्पर दोनों पदों
में विशेषण –विशेष्य तथा उपमान उपमेय का संबंध होता है |
समास
=समास विग्रह
खुशबू
=खुश (अच्छी) है जो बू
महापुरुष
=महान है जो पुरुष
परमात्मा
=परम है जो आत्मा
भ्रष्टाचार
=भ्रष्ट है जो आचार
राजीवलोचन
=राजीव(कमल) के समान लोचन
६
बहुव्रीही समास –समस्त पद कोई और
अन्य ही अर्थ देता है | वे शब्द एक विशेष अर्थ के लिए रूढ़ हो जाते है |जैसेः
गिरिधर =न तो गिरि पद प्रधान और न ही धर अपितु अर्थ निकलता है ---कृष्ण
समास
=समास विग्रह
वाग्देवी
=वह जो वाक् की देवी है –(सरस्वती)
पंचतंत्र
=पञ्च प्रकार का तंत्र (संस्कृत –पुस्तक )
लोकसभा
=लोक(लोगो)की सभा (भारतीय संसद का निम्न सदन)
लम्बोदर
=लम्बा है उदर जिसका –गणेश
त्रिफला
=तीन फलों का समूह –- हरडे,बहेड़ा,आंवला
मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018
इंट्रो (फ्रेशर )पार्टी
स्वागत है तुम्हारा, इस महाविद्यालय परिवार में |
![]() |
| प्रियंका जैन"चंचल" |
अभिनंदन है तुम्हारा, इस ज्ञान की बहार में ||
स्कूल अब यादों में ही खो गया ,
अब तुम्हारा एडमिशन, कोलेज में हो गया |
मन में नवीन आशाओं का संचरण होगा |
मन में भी कुछ संदेह व् भय होगा |
तो मेरे प्यारे दोस्तों , सुनों मेरी बात |
छोड़ो डर व संकोच हम है तुम्हारे साथ ||
छोटे हो तुम ,हम बड़े ,ऐसा न तुम सोचना |
जो भी कुछ हो प्रोब्लम, भेद हमसे खोलना |
छोटे हो या बड़े दोनों की प्रधानता है |
एक है विनम्रता तो दूसरी वात्सल्यता है ||
इंट्रो (फ्रेशर) पार्टी इसलिए रखी है आज |
ताकि तुमको हमसे रहे न कोई लाज |
आज हमारा तुमसे परिचय हो जाएगा |
और हमारा स्नेह भी द्विगुणित हो जाएगा |
हम तुम्हें कभी- कभी आदेश भी है दे सकते |
परन्तु भलाई के लिए ही बड़े है कुछ कहते |
अपनों पर ही हुक्म चलाया जाता |
गैरों को आदेश कभी नहीं भाता |
तुम बहुत ही योग्य और होशियार हो|
तुम भी कल के सुनागरिक तैयार हो |
खूब जमके तुम अपनी पढाई करना |
जीवन को उन्नति पथ पर अग्रसर करना |
मेरी एक बात पर जरा गौर करना -
जीवन में विनय व अनुशासन भी जरुरी है |
पढाई तो इन जीवन मूल्यों के बिना अधूरी है ||
तो इन बातों का रखना तुम ध्यान |
इस कोलेज की खूब बढ़ाना शान |
"चंचल" का तो बस यही था कहना |
यदि बुरा लगे तो दिल पे न लेना || सदा प्रसन्न चित्त रहना ||
बुधवार, 10 अक्टूबर 2018
गुरुवर
![]() |
| प्रियंका जैन "चंचल " |
आई हूँ सब छोड़ के गुरुवर ,पावन तेरा सहारा ||
करूँ कर्म मैं ऐसे प्रभुवर ,कर्म निकाचित काँटू |
सिद्ध हो तुम और मैं अज्ञानी यही भेद को पाटू|
मंशा एक यही "चंचल" की जन्म ना ले दोबारा || ...आई हूँ सब छोड़ के...
पाप अठारह बड़े भयंकर ,इससे करे किनारा |
जन्म-मरण के चक्कर से जब ही होगा छुटकारा |
सिद्ध गति को प्राप्त करें हम लक्ष्य हो यही हमारा||...आई हूँ सब छोड़ के...
बाहर से मीठा लगता जग ,अन्दर से बड़ा खारा |
मोहजाल में फँसकर करते ,जीवन अभिशप्त हमारा |
भटकाता भव -भव में जीव को ,ज्यों भटके बंजारा ||...आई हूँ सब छोड़ के...
भटक चुकी कितने भव जाने ,अब कर लिया सोच विचारा |
आई शरण में तेरे गुरुवर नहीं मुझे कोई गंवारा |
करती हूँ तुझ पर मैं श्रद्धा,करूं जीवन अर्पण सारा ||...आई हूँ सब छोड़ के...
प्राण ना प्यारे मुझको गुरुवर ना ही मुझे पैसा प्यारा |
करुणा भाव रक्खू जीवों पर ,समतामय हो नारा |
तभी मिलेगा वो परमानंद वो अनुपम सुख न्यारा ||...आई हूँ सब छोड़ के...
रविवार, 7 अक्टूबर 2018
हिन्दी परियोजना- निर्माण के अंतर्गत कुछ मुख्य बिन्दु
परियोजना- निर्माण के
अंतर्गत कुछ मुख्य बिन्दु
1. परियोजना का शीर्षक
2. परियोजना कर्त्ता का नाम- ........................................
3. कक्षा- .......................................
4. स्थान- ........................................ (विद्यालय का नाम)
5. परियोजना-निर्देशक- .......................................
6. प्रस्तावना-
7. विषय वस्तु के बारे में
(क) पूर्व ज्ञान से संबंधित जानकारियाँ (ख) विषय वस्तु से संबंधित जानकारियाँ
(ग) विषय वस्तु से संबंधित नियम/तथ्य/चित्र /आँकड़े
(घ) अन्य जानकारियाँ
8. परियोजना का निर्माण-
(क) आवश्यक सामग्रियॉं
(ख) निर्माण विधि
9. निष्कर्ष-
10. स्रोत -
--------------------------------------------------------
2. परियोजना कर्त्ता का नाम- ........................................
3. कक्षा- .......................................
4. स्थान- ........................................ (विद्यालय का नाम)
5. परियोजना-निर्देशक- .......................................
6. प्रस्तावना-
7. विषय वस्तु के बारे में
(क) पूर्व ज्ञान से संबंधित जानकारियाँ (ख) विषय वस्तु से संबंधित जानकारियाँ
(ग) विषय वस्तु से संबंधित नियम/तथ्य/चित्र /आँकड़े
(घ) अन्य जानकारियाँ
8. परियोजना का निर्माण-
(क) आवश्यक सामग्रियॉं
(ख) निर्माण विधि
9. निष्कर्ष-
10. स्रोत -
परियोजना कार्य का
प्रारूप
शीर्षक :-..................................................................................................
भूमिका :-
विषय-वस्तु :-
उपसंहार :-
आभार ज्ञापन
मैं
...................................................कक्षा बारहवीं का/की छात्र /छात्रा
हूँ |
इस परियोजना के
संकलन के लिए मैं अपने विद्यालय के प्राचार्य श्रीमान /श्रीमती..........................एवं
अपनी विषयाध्यापक श्रीमान /श्रीमती ........................................स्नात्तकोत्तर
शिक्षक हिंदी का/की अत्यंत आभारी हूँ ,जिनकी छत्रछाया व कुशल दिशा निर्देश को पाकर
ही मैं इस परियोजना को सफल रूप दे पाया /पायी हूँ | वास्तव में, इनका सहयोग व
मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहवर्धक था , जिससे मुझे पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ
|
ईश्वर की असीम
अनुकंपा ,गुरुजनों का कुशल निर्देशन ,सहपाठियों का स्नेहपूर्ण सहयोग व माता पिता
के स्नेहयुक्त सहयोगात्मक आचरण द्वारा ही मैं अपने इस परियोजना को पूर्ण करने में
समर्थ हो सका /सकी हूँ |
धन्यवाद |
मूल्यांकित बिन्दु
1- विषयवस्तु - 5 अंक
2- भाषा एवं प्रस्तुति -3 अंक
3- शोध एवं मौलिकता -2 अंक
4-श्रवण तथा वाचन -10
प्रमाण-पत्र
और आभार-पत्र के नमूने-
केंद्रीय विद्यालय,उज्जैन
परियोजना कार्य
सत्र -201....-.........
विषय -
मार्गदर्शक
शिक्षक का नाम
केंद्रीय विद्यालय****
|
प्रस्तुतकर्त्री /प्रस्तुतकर्ता
नाम –
कक्षा -..........वीं
|
प्रमाण पत्र
प्रमाणित
किया जाता है कि छात्र/छात्रा ****** कक्षा .......वीं के
द्वारा.................................................. विषय पर तैयार किया
गया यह परियोजना कार्य इनके अथक
प्रयासों का प्रतिफल है, जिसमें सरल शब्दावली में विषय से संबंधित अत्यंत रोचक जानकारी दी गई है |
मैं इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता/करती हूँ |
स्थान
–
दिनांक
|
अध्यापक का नाम एवं हस्ताक्षर
केंद्रीय विद्यालय ,उज्जैन
प्राचार्य का नाम एवं हस्ताक्षर
|
घोषणा
पत्र
मैं
घोषणा करता /करती हूँ कि ....................................................विषय पर तैयार किया गया यह परियोजना मेरी मौलिक कृति
है और यह अप्रकाशित है |
इस
प्रोजेक्ट में मैंने जिन पुस्तक, पत्र-पत्रिकाओं एवं अन्य स्रोतों से सहायता ली है,उनका
यथास्थान उल्लेख किया है |
स्थान
दिनांक
|
प्रस्तुतकर्ता/प्रस्तुतकर्त्री
................. कक्षा .....वीं
अनुक्रमांक -केंद्रीय विद्यालय उज्जैन
|
आभार
..........................................................-यह प्रोजेक्ट कार्य मेरे पूज्य शिक्षक ................जी के
विशेष मार्गदर्शन से ही संभव हो सका है, मैं उनके प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता/करती
हूँ |
इस
कार्य को पूर्ण कलेवर देने में मेरे पूज्य गुरुजन
श्री................ एवं श्री................और मेरी पूज्य माताजीका विशेष योगदान रहा है | मैं
उनको हृदय से धन्यवाद देता/ देती हूँ|
स्थान
दिनांक
|
प्रस्तुतकर्ता/प्रस्तुतकर्त्री
..... ....... कक्षा ...वीं
अनुक्रमांक -केंद्रीय विद्यालय
|
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