सोमवार, 24 सितंबर 2018

भला मानुष

अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी जिला करौली ,राजस्थान में  शिक्षक प्रशिक्षण  प्रवास  के दौरान सायं काल में दोस्तों के बीच घर से दूर माहौल को खुशनुमा बनाने की कोशिश में  हंसी ठिठोली ,तुकबंदी गीतों वाली शाम की एक  याद ---सादर समर्पित ...


 गंभीर नदी के तट पर एक बात हो गई दोस्तों -
एक भले मानुष से... मुलाक़ात हो गई दोस्तों ...!!
मैं "चंचल" भोली नादान,मारग से बिलकुल अनजान, 
मैं अकेली घबराई- सी करने लगा मुझसे पहचान ,
मीठी बातों में आ उसके साथ हो गई दोस्तों ...!!गंभीर नदी के तट पर ...
गोरा, चिकना चेहरा उसका ,मोरे मन को भाया,
मन ही मन मैनें तो उसको, सब कुछ अपना बनाया , 
उसके संग जाने कब, नदी पार हो गई दोस्तों ...!!गंभीर नदी के तट पर ...
प्रियंका जैन" चंचल "
शांति नगर में ज्यों ही पहुँची, मेरा सिर चकराया ,
हम दोनों को साथ देखकर एक आदमी आया ,
पहले थोड़ा मुस्काया ,फिर उसको गले लगाया ,
वो भला मानुष तो... गोरी नार निकल गई दोस्तों !!गंभीर नदी के तट पर ...

रविवार, 23 सितंबर 2018

क म ला


प्रियंका जैन "चंचल "
 
क  -           रो कर्म तुम सुन्दर सुन्दर , र्त्तव्य -निष्ठ बनने की प्रेरणा |
               भी हारना ना हिम्मत तुम ,  दा न  तुम विघ्नों से डरना ||

म -           धुर मधुर वाणी बोलो तुम ,  त करना बुरा व्यवहार |
               मुनिजनों का आदर करना ,  मानवता से करना प्यार ||

ला -          लालसा गर कुछ है करने की ,  लायक तभी तुम बन पाओगे |
                लाडली भारत माँ की बन "चंचल" लाजबाव कुछ कर जाओगे ||

कुछ भजन फ़िल्मी गानों की तर्ज पर

प्रियंका जैन" चंचल "

तर्ज -आपके प्यार में (राज़)
आत्मा देह के स्वरूप में भेद है |
जानता तू नहीं बस यही खेद है |
विवेक से काम ले.. तू तो मानव है -
सोच, क्या हेय, ज्ञेय, उपादेय है ||आत्मा देह ...
क्यूँ सँवारे इस देह को, ओ बाबले ,
क्यूँ निखारे इस चाम को, ओ बाबले |
मिट्टी की ये, काया तेरी, मिट्टी हो जायेगी |
सुन्दर -सी ये, काया तेरी, खाक हो जायेगी |
सोच तू ,आया क्यूँ ,क्या तेरा ध्येय हैं ||आत्मा देह ...
यह आत्मा है अज़र अमर ,
फिर तू क्यों करता है किसकी फिकर |
भीगे नहीं सूखे नहीं जले ना आग से
कर्मों का लेप इस पर चढ़ा मोह राग से
संभल हो 'चंचल' यह बात ज्ञेय है ||आत्मा देह ...

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तर्ज -प्यार किया तो निभाना (मेज़र साब)
खोता है पल- पल क्यों तू, होके क्यूँ यूँ दीवाना|
लिया है जनम तो तुझको है इक दिन मर जाना |
शुभ ध्यान तू लगाना,  शुभ ध्यान तू लगाना ||
तेरी जिन्दगी का मकसद ,हो मुक्ति वरण करना |
शुभ कार्य तुझको करना, पापों से तुझको डरना |
वृत्ति रही जो ये तेरी तो पाएगा तू सफलता ,
जीवन की डगर पे न होगी कोई विफलता ,
चाहता है गर तू  'चंचल' मोक्ष पद को पाना  ||
शुभ ध्यान तू लगाना,  शुभ ध्यान तू लगाना ||


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शनिवार, 22 सितंबर 2018

हे युग के सूत्रात्मा

जन -जन की श्रद्धा तुझ में ,तू ही है उसमें मुझमें
                                       हे युग के सूत्रात्मा .... !!!
जग को दिया है जो तूने ,गीता का अमूल्य उपहार ,
जो व्यक्ति करे आचरण ,निश्चय ही तदनुसार ,
                                    शेष नहीं फिर कामना ...!!!
जब -जब पाप बढ़ा धरती पर ,मचा रूदन औ हाहाकार |
रक्षक रूप में आए तब ,स्वीकार किए तुमने अवतार |
                                  दुष्टों का किया खात्मा ...!!!
लीलाधारी अज़ब निराली ,तेरी लीला जन -मन भायी
मैत्री क्या है तूने बताया ,प्रेम की वंशी मधुर बजाई
                                       राधा तेरी प्रियतमा ...!!!
जब जब जन्म लू इस धरती पर ,मुझको तेरी शरण मिले ,
धनी बनाओ या मुझे निर्धन ,बस तेरे ये चरण मिले ,
                                         ओ मेरे..परमात्मा ...!!!
युग ने ली अब अंगड़ाई ,कलयुगी भोर हुई भाई,
'चंचल' मन को समझाओं पथ विमुख न हो राही ,
                                   नित्य करो देवोपासना ...!!!

काहे करे रे बबेला

प्रियंका जैन "चंचल" 
आया है अकेला ,तू तो जाएगा अकेला |
काहे करे रे बबेला ,सारा जग ये झमेला ||
अपनी अपनी नावों पे सवारी सवार हैं,
 कुछ ही क्षणों में वो किनारे से पार है ,
देखों रे ये कैसा अद्भुत क्षण भर का मेला ||...आया है अकेला
कर्म किए है तूने, कैसे भारी भारी ,
मुक्ति नगर में जाने, कब तेरी बारी,
 तन को सजावे लेकिन मन तेरा मैला ||...आया है अकेला
करे नहीं कर्म सही, फल अच्छा चाहवे ,
ज्ञानी गुरु आवे, तुझे कितना समझावे ,
मन कैसा है रे तेरा 'चंचल' अलबेला  ||...आया है अकेला
तेरी जिन्दगी का यही मुद्दा बन जावे ,
देव, गुरु, धर्म पे श्रद्धा तू बढ़ावे ,
मिल जायेगी मुक्ति तुझको लगेगा न धेला|| ...आया है अकेला
*वीडियो *

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

संग दिलों की बज़्म

संग दिलों की बज़्म में, मेरा भला क्या काम है |
हुनर उनका है यही, देते वो गम ए इनाम हैं ||
उनकी फ़ितरत जाने कैसी ,जाने उनका ही ख़ुदा ,
रूह मेरी कांपती, करे चर्चा जब उनकी जुबां ,
दर्दे- दिल ,दर्द- ए- जुदाई, उनका यही पैगाम है ||
प्यार के ज़ज्बे से उनका, हैं नहीं कोई वास्ता ,
उनकी दुनिया है अलग ,और है जुदा हर रास्ता ,
गम के सागर में डुबो के ,छलकाते ये जाम है ||
जख्म देकर इनकी रूह को ,चैन मिलता है कहाँ 
छीन लेते है यह दिलवर से, शुकून का जहाँ 
मासूम दिल को क़त्ल करना, इनका शौक- ए- आम है ||
यह मुहब्बत इक इबादत, इसपे जां निसार है ,
बेमुरव्वत बेबफ़ा जानेंगे, ये क्या प्यार है .
इनकी नज़रों में मुहब्बत, बदनुमा इल्जाम है ||

 प्रियंका जैन "
चंचल"

गुरुवार, 20 सितंबर 2018

अहसान फरामोश

प्रियंका जैन "चंचल" 

        

  चुपचाप बैठे हुए कैसे खामोश हो,
  सच्ची-सच्ची कह दूँ  अहसान फ़रामोश हो |
  हरे भरे पेड़ों की क्यों करते कटाई तुम ,
  ऐसे ही तो प्यारे हरियाली हो गई है गुम ,
  कैसे भूल गए तुम, इनके महान गुण ,
  इनसे वसंत और इनसे है फाल्गुन |
  रही बेहोशी 'चंचल 'अब तो कोई होश हो |
जीवन दिया है तुम्हें ,बदले में चाह नहीं ,
कष्ट दिया है इन्हें, मुख से भी आह नहीं ,
इनके बिना जिन्दगी, तेरी कभी पार नहीं ,
इनकी रक्षा करने को, फिर क्यूँ तैयार नहीं |
मूरख! क्यों तुम्हें इनसे कोई सरोकार नहीं ,
निष्क्रिय रहे बहुत, अब तो कोई रोष हो |
सदा तेरा किया भला, धूप हो या छाँव हो ,
इनके प्रति भले ही तेरा कैसा भाव हो ,
इन वृक्षों को उगाने में तुम्हारा भी तो चाव हो ,
इनके लिए थोडा भी तुम्हारा लगाव हो |
काटते इन्हें हैं जैसे, इनका कोई दोष हो |
सच्ची सच्ची कह दूं अहसान फ़रामोश हो ||