रविवार, 7 अक्टूबर 2018

कक्षा ग्यारहवीं हेतु परियोजना के विषय

कक्षा ग्यारहवीं हेतु परियोजना के विषय
क्र०  सं ०  
परियोजना के  विषय
1
नानक,दादू और रैदास आदि के ईश्वर संबंधी विचार
2
कबीर के पदों का शास्त्रीय एवं लोक संगीत में गायन
3
तत्कालीन समाज और मीरा
4
प्रेम सत्य ,शिव और सुन्दर है
5
सागर संबंधी कविताओं का संकलन
6
हिंदी साहित्य में प्रकृति वर्णन
7
किसानो की वर्तमान स्थिति
8
प्रकृति के उपादान ; संदेशवाहक के रूप में
9
शहरों की ओर पलायन
10
बेरोजगारी की समस्या
11
महिला शिक्षा की अनिवार्यता
12
प्रसिद्ध गज़लकार और उनकी गजलों का मिजाज़
13
कन्नड़ की मीरा ;अक्क महादेवी
14
समाज में मौजूद ; सबसे खतरनाक
15
आदिवासी समाज की वर्तमान स्थिति
16
वायु प्रदूषण एवं उसका निवारण
17
प्राकृतिक परिवेश एवं उसका संरक्षण
18
लुप्त होते रीति - रिवाज
19
समाज में लडकियों की वास्तविक स्थिति
20
प्रेमचंद की कहानियाँ और लोक जीवन
21
भ्रष्टाचार एक सामाजिक बुराई
22
धन बनाम धर्म
23
अदालतें ;न्याय का मंदिर
24
वर्तमान में अखबारों की भूमिका
25
उपेक्षित पारंपरिक व्यवसाय
26
वर्तमान शिक्षा प्रणाली
27
विद्यालय पर एक डॉक्युमेंट्री फ़िल्म
28
फ़िल्म ;कला या व्यावसायिक माध्यम
29
फ़िल्म निर्माण में चुनौतियाँ -पहले और  अब
30
भारतेंदु हरिश्चंद्र और खड़ी बोली हिंदी
31
तानाशाही शासको का इतिहास
32
विदाई गीतों का संकलन
33
विज्ञापन की आकर्षक दुनिया
34
हस्तकला का कारोबार
35
प्रसिद्ध यात्रा वृतांत
36
व्यवसाय बनती शिक्षा की समस्या
37
घटते मानवीय मूल्य
38
तकनीकी शिक्षा का महत्त्व
39
मेरे सपनों का भारत
40
महत्त्वपूर्ण नारें और उनका सन्दर्भ
41
जवाहर लाल नेहरु
42
चित्रकला व्यवसाय नहीं ,अंतरात्मा की पुकार
43
कुछ भी नहीं असंभव जग में
44
प्रसिद्ध चित्रकार एवं उनके प्रसिद्ध चित्र
45
सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की लोकप्रियता
46
जीवन में संगीत का महत्त्व
47
धरती धोरां री
48
परित्यक्ता स्त्री की स्थिति
49
जल ही जीवन
50
भारतीय बाज़ार का बदलता स्वरुप
51
पर्वों का बदलता स्वरुप
52
महानगरीय जीवन अभिशाप या वरदान
53
प्राकृतिक आपदाएं और हमारी भूमिका
54
युवाओं में बढ़ती नशाखोरी ;समस्या एवं समाधान
55
मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत
56
हास्य व्यंग्य एवं प्रसिद्ध व्यंग्यकार
57
मनोरंजन के आधुनिक साधन
58
विद्यार्थियों में बढ़ता असंतोष ; कारण और निवारण
59
समाज में तिरस्कृत बुजुर्ग
60
जल संकट से जुडी खबरों का संकलन ;यथार्थ स्थिति एवं समाधान
61
वैश्विक स्तर पर हिंदी
62
विद्यार्थी जीवन में बढ़ते तनाव और उससे मुक्त होने के उपाय
63
नमक के दारोगा के संवाद ;नाटकीय रूपांतर
64
मजदूरी को मजबूर बचपन
65
भाषा में मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग
66
महात्मा गांधी और आधुनिक भारत
67
सोशल मीडिया और आज का युवा
68
स्वच्छ भारत अभियान
69
स्वतंत्र भारत और गरीबी
70
निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र
71
स्त्री शिक्षा और उनके मानवाधिकार
72
भारत में गहराता पेयजल संकट
73
सिन्धु घाटी सभ्यता -हमारा गौरव
74
विस्थापन की समस्या और स्त्री
75
हिन्दी के विकास में सिनेमा का योगदान
76
जनसंचार का महत्त्व
77
 हिंदी और इन्टरनेट
78
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की चुनौतियाँ
79
कबीर के मूल्यों का आज के समय में महत्व
80
हिन्दी मीडिया के चर्चित चेहरे











शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

कामकाजी माँ एवं मोदीजी के मंत्र

प्रियंका जैन "चंचल "
काम दिन भर किया ,
अब  गोद में सुला दों न माँ |
सारा दिन काम में  भुलाया मुझे ,
अब काम भुला दो न माँ |
जानता हूं व्यस्त हो ,
फाईलों में पस्त हो |
पर ना उम्मीद मेरी पस्त हो ,
बाहों के झूले में झुला दो ना माँ .||
 गोद में आज  तेरी सोने का मन है |
काम ज्यादा है और  समय थोड़ा कम है |
थकी हो,लगी हो,सबकी चिंता में पगी हो|
उलझन यही"चंचल "बन गई निर्मम है 
खाता खुशियों का खुला दो न माँ |
देके थपकी कहानी  सुना दो न माँ ||


************************************************

परीक्षा पे चर्चा आधारित कविता 

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

बेरोजगार की व्यथा

दो बेरोजगार थे  साथ- साथ ,
प्रियंका जैन "चंचल"
टाइम -पास करने को कर रहे थे बात |
पेट में भूख पर जेब खाली थी ,
रोजगार न होने से जीवन में बदहाली थी |
कितने ही ऑफिसों के लगाए चक्कर,
न जाने कितने दिए इंटरव्यू |
फिर भी परेशानी न हुई दूर,समस्या रही ज्यूँ की त्यूं |
मेरे माँ बाप ने पढाया यह सोचकर कि
 मेरा बेटा भी जाएगा सरकारी दफ़्तर ...
कमाएगा खूब केस ,फिर हम भी करेंगे ऐश |
पर हाय! किस्मत, सारे सपने चूर- चूर हो गए |
दिल के अरमा ,आंसूओं में  बह गए |
मेरे माँ बाप भी अपने सपने पूरे नहीं कर पाए |
इसी आस में तो उन्होंने अपने घर-बार लुटाए |
मैंने तो सीखा था दो और दो चार होते है |
पर मुझे पता लगा दो और दो पांच भी होते है :
घूस से झूठ साँच भी होते है
जिसका हो जाए जेक और चेक |
सरकार की नज़र में वही है नेक |
वही नौकरी के योग्य है |
वीर वसुंधरा भोग्य है |
मिला करते थे बचपन में अनेक मेडल व ट्राफिया ...
देख मुझे देते सब बारम्बार बधाइयां
और कहते थे --
यह एक दिन अपना नाम चमकाएगा |
पर क्या पता था उन्हें
यह तो भरपेट भोजन भी न पाएगा |
नीर गंगा का नहीं, मैं तो जल खारा हूं |
अरे ! "चंचल" वर्तमान की इस अव्यावहारिक शिक्षा प्रणाली का मारा  हूँ |
यदि शिक्षा को व्यावहारिक बना दिया जाता ;
तो मैं आज यूँ  दर दर की ठोकरें न खाता |
सैद्धांतिक रूप में जो हमें  सिखाया जाता ;
व्यावहारिक रूप में भी  मैं उसे ढाल पाता |
भावी भारत का कर्णधार हूँ मैं ,
इस दायित्व को भली भांति निभा पाता ||